एस्पोर्ट्स चाइनीज ड्रामा लिस्ट

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time:2021-10-27 04:16:08 कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में दिहाड़ी मजदूरी बढ़ी, यह है वजह Views:4591

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कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में न्‍यूनतम मजदूरी में 15-20 फीसदी का इजाफा हुआ है.
मुंबई : पिछले कुछ महीनों में कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में काम करने वाले वर्कर्स की न्‍यूनतम दिहाड़ी मजदूरी बढ़ी है. ये रियल एस्‍टेट, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, सीमेंट, स्‍टील, सड़क एवं हाईवे और शहरी विकास परियोजनाओं में काम करते हैं. मजदूरी में बढ़ोतरी की वजह लेबरों की कमी है. कंपनियों ने अपने पुराने प्रोजेक्‍टों को पूरा करने के लिए काम की रफ्तार बढ़ाई है.

कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में न्‍यूनतम मजदूरी में 15-20 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस सेक्‍टर में करीब 5 करोड़ लोग काम करते हैं. मानव संसाधन प्रबंधन फर्म बेटरप्‍लेस के अनुमान के अनुसार, महामारी से पहले की तुलना में मजदूरी 450-500 रुपये से बढ़कर 550-600 रुपये प्रति दिन हो गई है. वहीं, मजदूरों की उपलब्‍धता 70-75 फीसदी घटी है.

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मजदूरों को सबसे ज्‍यादा रोजगार कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में मिलता है. यह सेक्‍टर काफी कुछ असंगठित है. ज्‍यादातर वर्कर्स दिहाड़ी मजदूरी पर काम करते हैं. बेटरप्‍लेस के सीओओ सौरभ टंडन ने कहा कि लेबर की किल्‍लत के चलते कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में मजदूरी बढ़ी है. कंपन‍ियां तेजी से अपनी लंबित परियोजनाओं को पूरा करना चाहती हैं.

टॉप एग्‍जीक्‍यूटिव्‍ज के अनुसार, कुशल कामगारों की भारी किल्‍लत है. कारण है कि महामारी के बाद बड़ी संख्‍या में मजदूर अपने-अपने घरों से वापस नहीं लौटे हैं. रियल एस्‍टेट डेवलपर हीरानंदानी ग्रुप के एमडी निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि हम बाहर से कुशल कारीगरों को लाने की कोशिश कर रहे हैं. ये ज्‍यादा मजदूरी की मांग करते हैं. इससे कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में औसत मजदूरी बढ़ी है. कुशल श्रमिकों की कमी सिर्फ रियल एस्‍टेट की समस्‍या नहीं है, बल्कि यह दिक्‍कत हर सेक्‍टर की है. बहुत कम लोगों के पास काम की कुशलता होती है.

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इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍टों के बिल्‍डर केईसी इंटरनेशनल के सीईओ विमल केजरीवाल ने कहा कि फिटर और कारपेंटर जैसे कुशल कामगारों की मजदूरी 10-20 फीसदी बढ़ गई है. काम ज्‍यादा है. लंबित परियोजनाओं को पूरा करने का दबाव है. सभी साइटों पर पूरी क्षमता के साथ काम हो रहा है.

इंडस्‍ट्री के जानकार कहते हैं कि मध्‍यम और छोटे संस्‍थान जिनमें लॉकडाउन की शुरुआत में वर्कर्स को रोक पाने की क्षमता नहीं थी, उन्‍हें लेबरों को मंगाने में ज्‍यादा खर्च करना पड़ रहा है. कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर की बड़ी कंपनियों ने खाने-पीने और रहने की व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध कराकर अपने वर्कर्स को बनाए रखा.

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